‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मिल रही मजबूती
प्रदर्शनी स्टॉल के माध्यम से एमएसएमई की विभिन्न उद्यमिता पहलों को किया जा रहा है प्रदर्शित
सूरजकुंड शिल्प मेले में एक साथ आगे बढ़ रहे कौशल, संस्कृति और उद्यमिता
Faridabad : 6 फरवरी। सूरजकुंड की खूबसूरत वादियों में लोकल फॉर ग्लोबल-आत्मनिर्भर भारत की पहचान थीम के साथ आयोजित किए जा रहे 39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला रंग-बिरंगे शिल्प, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विविधता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इसी जीवंत मंच पर राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (एन.आई.ई.एस.बी.यू.डी.-निसबड) ने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। निसबड द्वारा लगाए गई विशेष प्रदर्शनी स्टॉल के माध्यम से कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसएमई) की विभिन्न उद्यमिता पहलों को प्रदर्शित किया जा रहा है, जिनका उद्देश्य पारंपरिक कौशलों पर आधारित स्वरोजगार और सतत आजीविका को बढ़ावा देना है और युवाओं को अधिक से अधिक जागरूक करना है।
यह मंत्रालय मेले में प्रदर्शनी स्टॉल के अलावा, मेले में आए कारीगरों और उभरते उद्यमियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद भी कर रहा है। इन संवाद सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को सरकारी योजनाओं, एमएसएमई सहायता तंत्र, वित्तीय संसाधनों और व्यवसाय की बुनियादी समझ से अवगत कराया जा रहा है। यह पहल जमीनी स्तर पर उद्यमिता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कार्यक्रम की विशेष झलक रही समावेशी उद्यमिता का उत्सव, जिसमें हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कारीगरों, पर्यावरण-अनुकूल नवाचार करने वाले उद्यमियों तथा ट्रांसजेंडर उद्यमियों द्वारा निर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया गया है। यह पहल न केवल पारंपरिक शिल्प को नया बाजार उपलब्ध करा रही है, बल्कि समाज के हर वर्ग को उद्यमिता से जोड़ने का सशक्त संदेश भी दे रही है। सूरजकुंड मेले में निसबड की यह सहभागिता‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती प्रदान कर रही है, जहां कौशल, संस्कृति और उद्यमिता एक साथ आगे बढ़ रहे हैं।



