सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में देश–विदेश की कला और संस्कृति का भव्य संगम
अतंर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प उत्सव में 50 देशों के 700 से ज्यादा देशी विदेशी प्रतिभागी कर रहे सहभागिता
Faridabad : 01 फरवरी। हरियाणा के फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड में आयोजित 39वां अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर सूरजकुंड शिल्प मेला–2026 इन दिनों देश-विदेश की समृद्ध कला, संस्कृति और परंपराओं का जीवंत संगम बनकर उभर रहा है। मेले में भारत सहित विदेशी कलाकार और शिल्पकार अपनी-अपनी विशिष्ट कलाओं के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।
मेले के दूसरे दिन रविवार को बड़ी संख्या में पहुंचे पर्यटकों ने लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जमकर ठुमके लगाए और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया। रंग-बिरंगी लोक कलाएं, नृत्य और संगीत ने पूरे मेले परिसर को उत्सवमय बना दिया।
15 फरवरी तक चलने वाले इस भव्य शिल्प उत्सव में तीन शनिवार-रविवार शामिल किए गए हैं, ताकि अवकाश के दिनों में अधिक से अधिक पर्यटक मेले का आनंद उठा सकें। आयोजकों की यह पहल पर्यटकों की बढ़ती भागीदारी को ध्यान में रखते हुए की गई है।
उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर सूरजकुंड शिल्प उत्सव-2026 का उद्घाटन शनिवार 31 जनवरी को देश के उपराष्ट्रपति माननीय सी. पी. राधाकृष्णन ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की गरिमामयी उपस्थिति में किया। इस अवसर पर हरियाणा के पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने सभी देशी-विदेशी मेहमानों का स्वागत करते हुए देश व प्रदेशवासियों से शिल्प उत्सव में अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनने का आह्वान किया।
पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि यह मेला “लोकल टू ग्लोबल, आत्मनिर्भर भारत” थीम पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें 50 से अधिक देशों के लगभग 700 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं, जो विश्व भर की हस्तशिल्प परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।
इस वर्ष मिस्र को पार्टनर देश के रूप में नामित किया गया है, जहां से आए शिल्पकार अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति की आकर्षक प्रस्तुतियां दे रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश और मेघालय को थीम स्टेट के रूप में शामिल किया गया है, जिनके कारीगर बुनाई, मिट्टी कला, लकड़ी शिल्प, कढ़ाई और लोक कला के उत्कृष्ट नमूनों का प्रदर्शन कर रहे हैं।
सूरजकुंड शिल्प उत्सव-2026 विश्व के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों और कारीगरों को एक अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहा है। यहां पारंपरिक शिल्प वस्तुएं, हस्तनिर्मित उत्पाद, टेक्सटाइल, आभूषण, घड़ियां और सजावटी कलाकृतियां दर्शकों को खासा आकर्षित कर रही हैं। यह आयोजन न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करता है, बल्कि कारीगरों को वैश्विक पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
15 फरवरी तक चलने वाला यह आत्मनिर्भर शिल्प उत्सव पर्यटकों के लिए एक यादगार अनुभव बनता जा रहा है।



