फरीदाबाद। (ANURAG SHARMA) ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर-86 स्थित एकॉर्ड अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या कुमार ने कहा कि नवरात्र के दौरान व्रत रखने वाली गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ मां और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है।
गर्भावस्था के दौरान शरीर को पर्याप्त पोषण, पानी और ऊर्जा की आवश्यकता होती है। लंबे समय तक भूखे रहने या केवल सीमित आहार लेने से कमजोरी, चक्कर आना, लो ब्लड शुगर और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसका सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने सलाह दी कि यदि गर्भवती महिला व्रत रखना चाहती है तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें और पूरी तरह निर्जला व्रत से बचें। व्रत के दौरान फल, दूध, सूखे मेवे, नारियल पानी और हल्का सुपाच्य आहार नियमित अंतराल पर लेते रहें, ताकि शरीर को जरूरी पोषण मिलता रहे। इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी बेहद जरूरी है।
डॉ. दिव्या ने बताया कि अधिक थकान, उल्टी, सिरदर्द, पेट में दर्द या बच्चे की हलचल में कमी जैसे लक्षण नजर आएं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। लापरवाही बरतने से समय पूर्व प्रसव, शिशु के विकास में कमी या अन्य जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि हर महिला की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए व्रत रखने का निर्णय व्यक्तिगत स्वास्थ्य के अनुसार ही लेना चाहिए। सुरक्षित और संतुलित तरीके से व्रत रखने पर ही मां और शिशु दोनों स्वस्थ रह सकते हैं।
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